रिंग रोड घोटाला मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई, 17 लोग गिरफ्तार
धनबाद सहित राज्य के कई जिलों में भू-अर्जन और रिंग रोड घोटाला में एसीबी की 10 सदस्यीय टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. इस घोटाला में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है.

Jharkhand (Dhanbad): धनबाद और रांची सहित राज्य के कई जिलों में ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने दबिश दी है. बता दें, भू-अर्जन और रिंग रोड घोटाला में एसीबी की 10 सदस्यीय टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. इस घोटाला में ACB ने धनबाद, रांची, गिरिडीह, दुमका और देवघर में पूरी रात ताबड़तोड़ छापेमारी की है साथ ही 17 लोगों को गिरफ्तार भी किया है. छापेमारी के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल के जवान तैनात रहें. 
आपको बता दें, भू-अर्जन घोटाला मामले में वर्ष 2016 में समाजसेवी रमेश राही द्वारा केस दर्ज कराया गया था. उस वक्त मामले में कुल 34 लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. जिनपर आरोप लगाया गया था कि सरकारी भूमि अधिग्रहण के दौरान नियमों की अनदेखी और उल्लंघन करते हुए भूमि से संबंधित अभिलेखों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं. 
इन लोगों को किया गया गिरफ्तार
इस प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने तत्कालीन बर्खास्त जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी (डीएलओ) उदयकांत पाठक, तत्कालीन अंचल अधिकारी विशाल कुमार, तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर नीलम सिन्हा, कुमारी रत्नाकर समेत अन्य अधिकारी और कर्मी सहित कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया है. 
पिछले 13-14 वर्षों से लंबित है मामला
ACB की यह कार्रवाई रिंग रोड घोटाला मामले से भी जुड़ा है. इस मामले में भी रमेश राही ने ही वर्ष 2015 में शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके आधार पर अब जांच आगे बढ़ी है. रिंग रोड परियोजना का यह मामला पिछले 13-14 वर्षों से लंबित है. जिसमें झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में रिंग रोड निर्माण से जुड़ी एक जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह एक नीतिगत मामला है, लेकिन भूमि घोटाले की जांच जारी है. 
रमेश राही के मुताबिक, वर्ष 2015 में उन्होंने इस घोटाले से संबंधित चार प्राथमिकी (FIR) धनसार और धनबाद थान में दर्ज कराई थी. जिसमें आरोप लगाया था कि रिंग रोड निर्माण के लिए भूमि का मुआवजा मूल रैयतों (जमीन मालिकों) को नहीं मिला है, जबकि रिकॉर्ड में करीब 76 करोड़ रुपए के भुगतान का दावा किया गया है.
100 से 150 करोड़ रुपये से अधिक का है घोटाला
रमेश राही ने वर्ष 2013 में ही इस मामले को उठाया था. लेकिन इस पूरे प्रकरण में वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की गई. जनता की सुविधा के लिए रिंग रोड का निर्माण किया गया था. लेकिन इसके लिए जिन जमीनों का अधिग्रहण किया गया था उसके बदले में दी जाने वाली मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर घोटाला और गड़बड़ी किया गया. आपसी मिलीभगत से भू-अर्जन अधिकारी, भू-अर्जन कार्यालय और अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने इस मुआवजा राशि की लूट की. बता दें, यह घोटाला करीब 100 से 150 करोड़ रुपये से अधिक का है. 
सरकार से मांग, सभी आरोपियों की संपत्ति हो जब्त
वहीं इस मामले में बड़ी कार्रवाई होने पर शिकायतकर्ता रमेश राही ने एसीबी को धन्यवाद करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि इस घोटाले में संलिप्त सभी आरोपियों की संपत्ति जब्त की जाए, जिससे भूमि अधिग्रहण के दौरान जिन लोगों की जमीन का मुआवजा इन्होंने लूट लिया है वह राशि उन्हें वापस दिया जा सकें.
रिपोर्ट- बंटी विश्वकर्मा









