रांची में खाद्य सुरक्षा जांच पर संकट: 56 नए अफसर, पर लैब एक ही
राज्य में गरीब 80 खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी काम करेंगे लेकिन जांच के बाद भेजे गए सैंपल कितने दिन में जांचे जाएंगे इसका आंकलन विभाग अब तक नहीं कर पाया। राज्य में सिर्फ एक प्रयोगशाला है जिसकी हालत खराब है। ना तो केमिकल है ना तो पर्याप्त मैनपावर।

RANCHI NEWS: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल में ही राज्य के लिए 56 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। विभाग का दावा है कि इनकी नियुक्ति से जांच प्रक्रिया तेज होगी और नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा। खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया लेकिन धरातल पर यह कदम कितना सफल होगा इस पर विचार करना जरूरी है। अकेले रांची जिले में अब 7 पदाधिकारी काम करेंगे। नए अधिकारियों में नया जोश और उत्साह दिख रहा है। उनका कहना है कि अब हर रोज शहर के अलग-अलग इलाकों, होटल, मिठाई की दुकानों और खाद्य इकाइयों से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। इससे मिलावट और नियमों के उल्लंघन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। लेकिन अफसरों की बढ़ोतरी के बावजूद सबसे बड़ी अड़चन जांच लैब की है। पूरे झारखंड में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सिर्फ एक ही सरकारी प्रयोगशाला है और उसकी हालत ठीक नहीं है। महज 15 लोगों की टीम पूरे राज्य से आने वाले सैंपलों का बोझ संभाल रही है। लैब में न तो पर्याप्त केमिकल हैं और न ही सभी उपकरण ठीक से काम कर रहे हैं। नया माइक्रोबायोलॉजी लैब अक्टूबर से बंद पड़ा है और अब तक शुरू नहीं हो सका है। प्रयोगशाला के प्रभारी के अनुसार, दिनभर में आने वाले सैंपल अलग-अलग तरह के होते हैं। वर्तमान व्यवस्था में महीने भर में सिर्फ 350 सैंपल ही जांचे जा पाते हैं। लैब को सुचारू रूप से चलाने के लिए 30 अतिरिक्त कर्मियों और जरूरी केमिकल की मांग की गई है। आंकड़े बताते हैं कि एक मिर्च या खोआ जैसे सैंपल की जांच में ही 3 से 5 दिन लग जाते हैं। ऐसे में जब राज्यभर में 80 खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी मैदान में उतरकर रोजाना सैंपल भेजेंगे, तो एकमात्र लैब उस बोझ को कैसे उठा पाएगी, यह बड़ा सवाल है। अधिकारियों का कहना है कि जांच की रफ्तार बढ़ाने के लिए लैब का सुदृढ़ीकरण और स्टाफ की कमी दूर करना जरूरी है। वरना नए अफसरों की मेहनत का असर जमीन पर नहीं दिखेगा और खाद्य सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
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