'हर घर जल योजना' जैसे बड़े-बड़े दावे फेल ! जान जोखिम में डालकर गहरे गड्ढों से पानी भर रही मासूम बेटियां
बुरहानपुर जिले के एक आदिवासी ब्लॉक धुलकोट क्षेत्र में इन दिनों लोगों की जिंदगी तपती धूप, प्यास से फटी धरती, सूखे पहाड़ और उन सबके बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रही है. यहां छोटी-छोटी बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे गड्ढे में जमा पानी को भरने के लिए पेड़ का सहारा लेकर नीचे उतर रही है.

Burhanpur / Madhya Pradesh(Report By- Ashok Soni): देश के कई हिस्सों में इन दिनों प्रचंड गर्मी और लू का प्रकोप है जिसका खासा असर लोगों के जनजीवन पर पड़ रहा है. एक तरफ जहां लोग गर्मी से पेशाान है तो वहीं दूसरी ओर इस तपती गर्मी में उनके समक्ष पानी की किल्लत सामने आने लगी है केंद्र की सरकार देश के ग्रामीण इलाकों में हर घर जल योजना के तहत घर-घर जल-नल पहुंचाने का दावा करती है लेकिन सरकार के ये सारे दावे फेल होती दिख रही है.
दरअसल, मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे. देश के किसी हिस्से में जब चुनाव होने को होता है तो ऐसे समय में हम अक्सर बड़े-बड़े जन सभाओं और रैलियों में केंद्र में बैठी सरकार के नेताओं के भाषण सुनते हैं जिसमें वे सरकार के कई बड़े-बड़े कार्यों और योजनाओं की जानकारी लोगों को बतलाते है सरकार की उन योजनाओं में एक 'हर घर जल योजना' भी शामिल हैं. इसके तहत सरकार ग्रामीण इलाकों में घर-घर जल-नल पहुंचाने का दावा करती है. लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के कुछ इलाके के लोग अब भी सरकार की इस योजना से कोसों दूर हैं.
प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप है खबर बुरहानपुर जिले का है जहां इन दिनों लोगों का हाल गर्मी से बेहाल तो है ही...लेकिन इस तपती गर्मी में अब वे पीने के पानी के लिए तसर रहे हैं. जिले के एक आदिवासी ब्लॉक धुलकोट क्षेत्र में इन दिनों लोगों की जिंदगी तपती धूप, प्यास से फटी धरती, सूखे पहाड़ और उन सबके बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रही है.

तस्वीरें धुलकोट क्षेत्र के ग्राम भग्वानिया के सरबड़ गांव, रेखलिया झिरा फालिया से सामने आई है. ये तस्वीरें किसी दूर देश के अकाल की नहीं. हमारे देश भारत की ही हैं जहां “हर घर जल और नल योजना” जैसे बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि धुलकोट के कई आदिवासी और दूरदराज़ गांव आज भी पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए रोज संघर्षशील हैं.
सबसे पीड़ादायक दृश्य यह है कि इस लड़ाई में सबसे आगे छोटे-छोटे मासूम बच्चे नजर आते हैं, जिनके हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे पानी भरने की जद्दोजहद में लगे हैं. तस्वीरों में महिलाएं और बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे खतरनाक गड्ढों में उतरती और पानी भरती दिखाई देती हैं. कहीं पेड़ों की जड़ों का सहारा लेकर नीचे जाना पड़ता है, तो कहीं फिसलन भरी पथरीली ढलानों पर हर कदम मौत का खतरा लिए होता है.
गड्ढे के नीचे जमा पानी जो इतना गंदा और दूषित है कि उसे देखकर कोई पशु भी पीने से हिचक जाए, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि वहीं पानी इन लोगों की प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा बन चुका है. ये तस्वीरें सिर्फ पानी की कमी नहीं दिखातीं, बल्कि उन वादों और व्यवस्थाओं की भी सच्चाई सामने लाती हैं, जो आज भी देश के कई गांवों तक नहीं पहुंच पाई हैं.
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