26 सीटें, 28 उम्मीदवार; राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सस्पेंस
राज्यसभा की 26 सीटों के लिए 28 उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। मध्य प्रदेश और झारखंड में बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा की रणनीति ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है।


नई दिल्ली। राज्यसभा की 26 सीटों के लिए 28 उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। जहां कई राज्यों में उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना थी, वहीं कुछ राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवारों की एंट्री ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर भाजपा की रणनीति ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
राज्यसभा चुनाव आमतौर पर विधानसभा में दलों की संख्या के आधार पर तय हो जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ राज्यों में मुकाबला बनने से क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर भाजपा ने विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।
मध्य प्रदेश में बदला चुनावी समीकरण
सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश को लेकर है, जहां भाजपा ने अपेक्षित संख्या से अधिक उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इसके बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी को आशंका है कि यदि वोटिंग के दौरान किसी तरह की क्रॉस वोटिंग होती है तो उसके उम्मीदवार की राह मुश्किल हो सकती है।
झारखंड में भी त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति
झारखंड में भी राज्यसभा की सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे चुनावी गणित और जटिल हो गया है। सभी दल अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटे हुए हैं और अंतिम नतीजा वोटिंग के दिन ही स्पष्ट होगा।
भाजपा की नजर राज्यसभा में और मजबूती पर
राज्यसभा में संख्या बल बढ़ाना भाजपा और एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उच्च सदन में मजबूत स्थिति सरकार को विधेयकों को पारित कराने में मदद कर सकती है। इसी वजह से भाजपा उन राज्यों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां अतिरिक्त सीट हासिल करने की संभावना बन रही है।
कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
विपक्षी दलों की सबसे बड़ी चिंता अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखना है। यदि किसी राज्य में क्रॉस वोटिंग होती है या कुछ विधायक मतदान से दूरी बनाते हैं, तो चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लगातार अपने विधायकों के संपर्क में हैं और रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं।
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक ताकत का संदेश भी देता है। चुनाव के नतीजे यह संकेत देंगे कि विभिन्न राज्यों में किस गठबंधन की पकड़ कितनी मजबूत है और कौन सा दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहा।

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