न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स की बढ़ेगी रफ्तार, सरकार ने हटाया आयात शुल्क बोझ
केंद्र ने दी भूतलक्षी टैक्स छूट

केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मजूबत बनाने के लिए 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 के बीच आयात किए गए खास परमाणु ऊर्जा उत्पादन उपकरणों पर सीमा शुल्क में भूतलक्षी छूट का लागू कर दिया है। जो भी आयात इस दौरान हुए हैं उन पर पहले से लागू कस्टम ड्यूटी(Customs Duty) , अतिरिक्त कर या बकाया शुल्क कुछ भी नहीं वसूला जाएगा, ये फैसला 11 जून को वित्त मंत्रालय की अधिसूचना जारी की गई है। सरकार का ये कदम परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ी राहत बताया जा रहा है क्योंकि कई कंपनियां और एजेंसियां पिछले कुछ वर्षों से आयात शुल्क से जुड़े उलझे हुए विवाद, और टैक्स दावों का सामना कर रहे थे, कुछ मामलों में दिक्कत ऐसी थी कि कानूनी दिक्कतें भी बढ़ गई। यह अधिसूचना लागू होने के बाद पुराने केसों को नियमित माना जाएगा और फिर आयातकों को कानूनी साथ ही वित्तीय दबाव से थोड़ी राहत मिल सकेगी।
जानकारी के मुताबिक, भारत में चल रही कई परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए विदेशों से आधुनिक मशीनरी, रिएक्टर उपकरण और तकनीकी सिस्टम मंगाए जाते है। फिर भी, कुछ जगहों पर सीमा शुल्क छूट की स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, जिसके चलते कंपनियों पर अतिरिक्त टैक्स लगा दिया जाता है। नतीजा ये हुआ कि परियोजनाओं की लागत ऊपर गई और प्रशासनिक देरी की समस्या भी दिखने लगी थी। अब वित्त मंत्रालय ने तस्वीर साफ कर दी है और तय अवधि में आयात किए गए पात्र उपकरणों को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया गया है। सरकार का तर्क ये है कि ऐसा करने से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, और ऊर्जा उत्पादन वाली परियोजनाओं की रफ्तार भी तेज जाएगी।
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