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Thursday, June 21News That Matters

5 जून 2018: पर्यावरण दिवस

हमारे जीवन को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाने के लिए पूरे विश्व में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पर्यावरण दिवस की स्थापना की गई, क्योंकि हम जिस युग में अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उस युग में पर्यावरण एक बहुत ही बड़ा मुद्दा है। और इसके प्रति हर देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक हो जाना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में पर्यावरण में प्रदूषण जैसी समस्या समस्त संसार के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

सन 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने समस्त देशों को आमंत्रित कर पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें लगभग 119 देशों ने भाग लिया, और इसी सम्मेलन में सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का जन्म हुआ। इसी कारण प्रत्येक 5 जून को पर्यावरण दिवस पर हर देश के हर नागरिक को पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण जैसी समस्याओं से अवगत कराया जाता है।

पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए युवाओं और विद्यार्थियों से सबसे बड़ी उम्मीद होती है। स्कूलों में पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों में विद्यार्थी सक्रियता से भाग लेते हैं। जिसमें अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों अथवा गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जैसे स्वच्छता अभियान, कला प्रदर्शनी, पेड़ लगाने के लिए लोगों कोजागरुक करना, निबंध लेखन एवं सोशल मीडिया अभियान। पर्यावरण दिवस पर देश विदेश के हर नागरिक, युवा एवं विद्यार्थियों के सक्रियता से भाग लेने से एक संदेश प्रसारित होता है, और वह संदेश यह है कि प्रकृति द्वारा उपहार स्वरूप दिए गए ग्रह को प्रदूषित ना कर उसे सकारात्मक तरीके से संरक्षण करें। पर्यावरण में संतुलन स्थापित करने के लिए प्रत्येक जीव जंतु का महत्व होता है।

उदाहरण के लिए अगर हम बात करें तो “गिद्ध” जो कि पर्यावरण में संतुलन स्थापित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लेकिन अब उनके ना रहने से यह संतुलन अब असंतुलित हो चुका है। अलग-अलग तरह की बीमारियां फैल रही है। जो एक जीव से दूसरे जीव दूसरे जीव से तीसरे जीव में विचरण कर रही है। लोग स्वस्थ जीवन जीने से वंचित होने लगे हैं। मानव को जीने के लिए लोगों को दवाइयों का सहारा लेना पड़ रहा है। यह सब प्रकृति में व्याप्त असंतुलन ही तो है।

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